Friday, June 16, 2017

अब नहीं दिखेगा 50 साल का गवाह पीपा पुल


पांच दशक से लोगों को गंगा पार कराने वाला पीपा पुल आज इतिहास के पन्नो में दर्ज हो गया।शहर को रामनगर को जोड़ने वाला यह पीपा पुल अपने आप में इतिहास के कई अध्याय समेट कर विदा हो गया। सरकारी डेडलाइन सच साबित हुई तो 30 जून से ही बगल में बन रहा सामने घाट पुल अब लोगों को गंगा पार करने का नया साधन बनेगा।
पंद्रह जून की आधी रात को पुरे विधि विधान से पूजा करके इस ऐतिहासिक पीपा पुल को तोड़ दिया गया। सरकारी दस्तावेज के 1967 में पीपा पुल का निर्माण कराया गया था।
प्रतिवर्ष बाढ़ का पानी घटने के बाद पीपे का पुल बनाया जाता था और मानसून की दस्तक से पहले हर साल 15 जून को तोड़ दिया जाता था। गुरुवार की रात को लोकनिर्माण विभाग के कर्मचारियों द्वारा तोड़ा गया पुल अब कभी नहीं लगेगा। पंद्रह जून से पंद्रह अक्टूबर तक मानसून के कारण गायब रहने वाला यह पीपा पुल अब हमेशा के लिए गायब ही रहेगा।⁠⁠⁠⁠
पीपा पुल को लेकर इतिहास में कई प्रकार के कहानी बनारस के साहित्य में समेटा हुआ है। अंग्रेजो के जमाने में प्रिंसेप ने पीपे के पुल गंगा नदी के किनारे सुरक्षा व्यवस्था को शख्त करने के लिए बनवाया था। गुलामी के दिनों में इस पुलिस के किनारे अंग्रेज सैनिक तैनात होते थे, आजादी के बाद इस पुल की सुरक्षा की जरूरत न महसूस होने के कारण हटा दिया गया।
गौरतलब है की कई सालो से बन रहे सामने घाट का अपने निर्माण के अंतिम चरण में है। अगर सब ठीक ठाक रहा तो 30 जून से ये पुल जनता को सीधे रामनगर से जोड़ेगी।




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